जब कृष्णा को अक्रूर जी मथुरा ले जाते है, तो जशोदा मां कहती है, “सूल होत नवनीत देखि मेरे, मोहन के मुख जोग|” तब मां की सह्र्दयता अपने ममतामयी रूप में प्रस्तुत होती है| (सूरदास […]