Author: Mohit

  • तेरे दुःख मेरा कर्ज

    तेरे दुःख मेरा कर्ज

    मेरे जीवन का किसान बनकर,
    तूने सफलता के बीज़ बोए |
    अपने सपने बेचकर तूने,
    मेरे मामूली ख़्वाब संजोए |

    अक्षर का शुरूआती ज्ञान￰￰ देकर
    मुझे अपना शिष्य बनाया |
    अपना पेट काट -काट कर ,
    तूने मेरा भविष्य सजाया |

    अंको का लालच बहुत था मुझे ,
    रात – रात जागना होता था |
    तेरी नींद अचानक खुलती ,
    न चाहते हुए भी सोता था |

    एक तेरा साथ रहा ,
    तभी तो मेरा आज है |
    पूरा श्रेय मुझे दे दिया ,
    कहा , “तू ही तो मेरा नाज़ है”|

    दुनिया जब भी विरोध में थी ,
    तूने मेरा साथ दिया है |
    किसी का भी भरोसा न था ,
    उस पल तूने विश्वास किया है |

    जब -जब मुझे ठोकर लगी ,
    तेरी आँखे रोती थी |
    टुकड़ो – टुकड़ो में मैं सोता था ,
    तेरी आंखे न सोती थी ||

    ©moHiT

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