Mohit Negi Muntazir's Posts

जब हमें तुम याद आये रात भर

जब हमें तुम याद आये रात भर आंसुओं ने ग़म बहाये रात भर। ख़्वाब कितने ही सजाये रात भर जिनको चाहा वो न आये रात भर। एक सूरज ढल गया जब शाम को चांद तारे मुस्कुराये रात भर। कल मुझे इक फूल पन्नों में मिला दिन पुराने याद आये रात भर। जिनके प्रियतम दूर थे परदेस में चांदनी ने दिल जलाये रात भर। कहते हैं जो किस्मतों का खेल है ख़्वाब उनको क्यों जगाये रात भर। »

हाइकु -2

रोते हो अब काश। पकड पाते जाता समय। अँधेरा हुआ ढल गई है शाम यौवन की। रात मिलेगा प्रियतम मुझको चांद जलेगा। आ जाओ तुम एक दूजे मैं मिल हो जाएं ग़ुम। पहाड़ी बस्ती अंधेरे सागर में छोटी सी कश्ती। आंखें हैं नम अपनो से हैं अब आशाये कम। रिश्ता है कैसा सुख में हैं अपने मक्कारों जैसा। »

हाइकु -१

बेपरवाह है फिरता दर दर रमता जोगी। चलते जाओ यही तो है जीवन नदिया बोली जनता से ही करता है सिस्टम आंखमिचोली। घूमो जाकर किसी ठेठ गांव में भारत ढूँढ़ो। लक्ष्य है पाना तुम एक बनाओ दिन रात को। कुछ कर लो सौभाग्य से है मिला मानव तन । »

भाग्य विधाता लोकतंत्र के

कितनी ही मेहनत करके दो जून रोटियां पाते हैं भाग्य विधाता लोकतंत्र के सड़कों पर रात बिताते हैं। अफ़सोस नहीं हो रहा उन्हें जो कद्दावर बन बैठे इन्हीं के पोषित देश भूमि के जो सत्ताधर बन बैठे इन मक्कारों के खेल में हिंदुस्तानी ऐसे ही रह जाते हैं। भाग्य विधाता…………..। अट्टहास आकाश कर रहा, धरती धारण दुख करती यह पवन छूकर ज़ख्मों को और अधिक पीड़ा भरती इस दुख से दो मुक्ति हमें हे देव!... »

सुनो संगी चमन वीरों

सुनो संगी चमन वीरों तुम्हारा सत्य हो सपना हौसला दिल में उम्मीदें निगाहें लक्ष्य पर रखना। जो है संकल्प करता तू अटल स्वलक्ष्य पाने को रगो में जोश इतना भर हो सक्षम नभ झुकने को लिए दृढ़ प्रण बढ़ते चल, स्वाद अनुभव का भी चखना। हौसला दिल में उम्मीदें…………..। अभी शुरुआत है तेरी न अपनाजोश खो देना कभी कँटीले मिलेंगे पथ, न अपना होश खो देना मंज़िल न मिले जब तक, न तब तक तू कभी रुकना। हौस... »