Author: Muhammad Azm Thakurdwarvi

  • ईद कैसे मनाये

    Mahol gham gusar hai kese manaye eed…
    Dil sakht be qarar hai kese manaye eed.

    Har rah khar zar h kese manaye eed.
    Jn in ki ye pukar hai kese mnayen eed

    Pani bhi misl e maar h kese manaye eed.
    Har samt intishar ha kese mnayen eed…

    Mzloom aurton ko share rah chhodker.

    Mzdoor Dr qtar h kese manaye eed

    Ye wayras ki maar h kese manaye eed.

    Apna paraya far h kese manaye eed.

    Sadkon pe Ghar Mai kitne h u Jaan bahaq huge.
    Har aankh ashkbaar h kese manaye eed

  • ग़जल

    सावन के पावन कवियों और शाइरों के बीच मेरी कही गई
    गज़ल प्र्स्तुत की जाती है.

    1-फिर हयात पाएगा मौत पाके आदमी.
    रुक ना पायेगा कभी सिलसिला हयात का.
    2-तू जहान मै ना चल ख़ुदस री की राह पर.
    हक़ पे चल के यही रास्ता नजात का.
    3-जिसकी नींद क़िस्मत ए दीन को जगा गई.
    केसा होगा जागना उस अज़ीम ज़ात का.
    जो भी बन जाता है दिल से आप का फ़रमाँ रावा.
    रुख़ पलट देता है पल मै बारिश ए आफ़ात का.
    4-सुबह हो के शाम हो, दिन हो चाहे रात हो.
    चल रहा है हर घड़ी काम काएनात का.
    4-होगया यक़ीं हमें जब खुदा की ज़ात का.
    दौर ख़त्म होगया, लात का मनात का.
    5-मीम ऐन और फा, ऐसे एक जा हुए.
    बारह बनके आगया, जोड़ सात पांच का.
    7-रोना छोड़ दीजिये, इस पे ग़ौर कीजिये.
    किस तरह से दूर हो दौर मुश्किलात का.
    8-होंसलें की शमा कम ना होगी रौशनी.
    वक़्त चाहे दिन का हो या अंधेरी रात का.

    9-ऐ निगाहे मेहरबां, मेरी सम्त देख ले.
    कब से मुन्तज़िर हूँ मैं चश्मे इल्तिफ़ात का.
    10- जब तुम्हारी दोस्ती अज़्म जाहिलों से है.
    कियूं भला बुरा लगा जाहिलों की बात का

    लेख़क मुहम्मद शाकिर “अज़्म “..https://www.facebook.com/mohdshakir.azm

    धन्यवाद………

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