Author: Naushin Shaikh

  • ज़िंदगी!!

    ज़िंदगी!!

    ये हसीन लम्हे,
    ये बीते हुए बेहतर क्षण,
    ये हार कर जीत जाना,
    ये प्यार से मुस्कान देना,
    किसी अंजान मैं अपना पन पाना,
    किसी और की खुशी में खुश होना,
    क्या इसी का नाम है जिंदगी???

    कल की फिकर में,
    आज का चैन गवाता है,
    सब के साथ रहकर भी,
    तू खुदको अकेला पाता है,
    क्या थी वो जिंदगी जहां मुस्कुराना था रोज का, क्या है ये जिंदगी जहां परेशानी है रोज की,
    2 दिन की दुनिया के लिए तू सबसे लड़ जाता है, सबको खुश करने के लिए,
    तू कौन था तू खुद भूल जाता है!

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