Author: Neelam garg

  • बीती रात, टूटी आश

    आश लगाई , दूर मेघालय में
    कर्जा लाया, बीज लगाया
    खेतो खलियानो में………
    बीता सावन ,भादो आया
    न आया बादल,
    खेतो खलियानो में……..
    बीती रात, टूटी आश,
    बैठा किसान,
    खेतो खलियानो में…….
    कुऐ सुखे, धरती प्यासी,
    न आया पानी ,नल कूपों में……
    चेहरा मुरझाया,
    पानीआया ,ऑखो में…….
    उदर दहक उठा,
    धुऑ ना उठा चूल्हो में……
    कोहराम मचा घरानो में….
    फन्दो पर झूला,
    लटक रहा किसान
    खेतों खलियानों में……।

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