Author: Neeraj Mishra

  • फूलों से कह दो चमन में

    फूलों से कह दो चमन में अब न यूँ महका करें ।
    खौफ से कांटों के अब सब काँटों का सिजदा करें ।

    चाँद किस से जाके अपनी दास्ताँ ए दिल कहे ,
    जब उजालों के ही आशिक चांदनी रुसवा करें ।

    प्यार देने वाले भी तो खा रहे धोखे यहाँ ,
    आदमी की जात का अब हम “भरोसा” क्या करें ।

    अपने दिल की रहगुज़र पर जो अकेले ही चले ,
    क्यूँ जमाने वाले उनके प्यार पर पहरा करें ।

    इतना ही काफी है “नीरज” दिल के रिश्तों के लिए,
    तुम हमें समझा करो और हम तुम्हे समझा करें ।

    नीरज मिश्रा

  • पर्व सबका ये दीपावली का रहे

    घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे ।
    चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे ।

    जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी
    पर्व सबका ये दीपावली का रहे ।

     

    घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें प्यार से ,
    हर तरफ सिलसिला दोस्ती का रहे ।

    आओ दें एक दूजे को शुभकामना ,
    दौर सबके लिए उन्नती का रहे ।

    ऐसी दीवाली हो अब दुआ कीजिये ,
    सबके दिल में तसव्वुर ख़ुशी का रहे ।

    नीरज मिश्रा

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