वो जो मस्ुकराई थी कल यहाँ,
आज कुछ खामोश सी है।
वो जो लड़की बठै ी हैवहाँ,बड़ी प्यारी सी है।
रूप सादा ,लि बाज़ सादा ,
जि सकी ऑखं थोड़ी सी अभी भी नीची है।
बड़ी रुहानी सी है,
ना हर्फ़ , ना वाक्या , ना क़ि स्सा ,
वो एक अफ़साना ,एक कहानी सी है।
वो जो लड़की बठै ी हैना वहाँ,बड़ी प्यारी सी है।
Author: Neha yadav
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जो मस्ुकराई थी कल
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मैं रहूँ या ना रहूँ
मैं रहूँ या ना रहूँ मेरे नाम रह जाए
धन भले ही ज्यादा न हो पर
मान -सम्मान जग -जग में हो
तकलीफ भले ही मिले
पर जीत का इरादा पक्का हो