तुम्हें अंदाजा भी है तुम क्या किए जा रहे हो रोज हमें अंत के करीब लिए जा रहे हो हे मानव! क्या तुम्हें समझ है, क्या तुम्हें पता नहीं प्रकृति पर किसी का जोर नहीं, […]