Author: Nitika Garg

  • मेरे हाथ

    मेरे हाथ, मेरे दिल की तरह
    कांपते हैं, जब मैं
    उन सलवटों को अपने भीतर समेटती हूं

  • सलीब

    बहुत सी सलीबें लटका रखी हैं मैंने
    इस दुनिया में जीना आसान नहीं है !

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