Author: parul lala

  • जब कभी रास्ता ना नजर आए, ना कोई साथ हो तेरे।

    जब कभी रास्ता ना नजर आए,
    ना कोई साथ हो तेरे,
    बस बैठ जाना अकेले उस दरिया किनारे।
    सवाल तो होंगे बहुत,
    मगर जवाब कम ही मिलेंगे।
    मगर तू खफा ना हो,
    यहां सब ऐसे ही मिलेंगे।
    चलते चलते कई बार थक जाएगा,
    तो अपने खुदा को याद करना,
    सहारा तुझे अपने आप मिल जाएगा।
    सफर तेरा ये अकेला है।
    समझ ले इसे।
    मंजिल जब पाएगा,
    तो वह कच्चे रास्ते भी
    खूबसूरत लगने लगेंगे।

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