Author: Kuldeep Prajapati Vidhyarthi
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तिरंगा
मेरे लब पर तेरे लब पर सब के लब पर गंगा है,
जो भारत का वासी केवल उसकी जान तिरंगा है(कुलदीप विद्यार्थी)
जब कलम की जरुरत थी उठाई, आज तिरंगे की जरुरत पड़ी उठा लिया, बाकी ये देश के गद्दार समझ जाए पीछे कभी हटने की सोची नहीं हैं
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दीया हूँ मैं तू ज्योति बनकर जलने की कोशिश कर
न जा तू दूर थोडा पास आ मिलने की कोशिश कर,
जरा हँसकर के मेरे साथ तू चलने की कोशिश कर,
काश बदल जाए इरादा जो अभी तक था तेरे दिल में,
दीया हूँ मैं तू ज्योति बनकर जलने की कोशिश कर।कुलदीप विद्यार्थी
