Author: Pradip

  • “बिटियाँ . . .”

    रब का अनमोल वरदान बिटियाँ हैं |
    ज़ैसे की, तुफ़ान से टकराता दिया हैं |

    रिश्तों के मोती तो अक़्सर बिख़र ज़ाते,
    मगर, दो परिवारों को ज़िसने सिया हैं |

    प्यार के किस्से तो बड़े शौक से सुने ज़ाते,
    इन बेटियों से ही तो प्रेमीयों की प्रिया हैं |

    समज़ – समज़ कर समज़ सको तो,
    रब की पैंगाम भिज़वाती चिठ़ियाँ हैं |

    गर्भपात करनेवालों अभी तो सुध़रो,
    लड़की नहीं तो लड़के देंगे किसे ज़िया हैं?

    ज़ब बेटि ही नहीं, तो फ़िर पापा कैसे?
    फ़िर, पापाओं की कैसी बनेगी परियाँ हैं?

    ओ माट़ी के पुतलो अब तो होश में आओ,
    बेटियाँ ही तो सोने की रानी गुड़ीयाँ हैं |

    यहाँ बातें तो होती बड़ी परंपराओं की,
    बेटि से ही माथें की बिंदी और चुड़ीयाँ हैं |

    ✍? प्रदिपकुमार साख़रे
    ?+917359996358.

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