तबाही का मंज़र इस कदर देखा हैं_
रूह गुम रही जिस्म बेजान देखा हैं_
कोई तफ्तीश करों मोहब्बत की यारों की
वो दिवानों को बिमार करती हैं या शिकार_
-PRAGYA-
Author: Pragya Deole
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मोहब्बत बिमारी या शिकार
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ढलती उम्र का प्यार
क़ातिब बन इस दिल ने तुझे लिखा हैं मुकद्दर में_
क्यूँ एक उम्र बित जाने के बाद_?
-PRAGYA-
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हसीन मुलाकात
वो ज़िन्दगी का सबसे हसीन मोड़ था
जब तुझसे रूबरू हुए_धड़कने काबू में नहीं थी
नज़रें तुमसे मिलने को बेक़रार थी
इख़्लास बेइंतहा इस दिल को तुमसे कुछ इस मानिंद हुए_एक – एक लफ़्ज़ तेरा ज़िन्दगी बन गया
कुछ इस जुनून-ए-हद तक हम तेरे दिवाने हुए_-PRAGYA-