देश बना बाज़ार अब, चारो ओर दुकान राशन है मँहगा यहाँ, सस्ता है ईमान राजा- रानी तो गए, गया न उनका मंत्र मतपेटी तक ही सदा, रहा प्रजा का तंत्र सर्वाहारी क्यों इसे, बना दिया […]

डूब वहाँ, मोती जहाँ, कंकड़ मत तू छान सुख-माणिक का सिंधु बस, राम नाम ही जान “मैं”, “मेरा” ही जगत में, सब कष्टों का मूल “तू”, “तेरा” वह मंत्र जो, काटे कष्ट समूल माया वह अंधी गली, […]