सावन

बदलती ऋतुओं से बदल रहा है मन देखते इन नजारों को बाबरा हो रहा है तन बादलों के टूटने की लड़ी आ रही है वह…

अस्तित्व

“ख्वाहिश ना ऐसो आराम की, चाहत ना दौलतो के शान की, जरूरत तो है बस, खुद के पहचान की” हर एक के लिए उसका शान…

पहचान

होना था तेरा, पर तेरा होना ही सिर्फ मेरा पहचान नहीं | तू था जरूरी, पर एक जरुरी ख्वाब नहीं | सिर्फ तेरा होना ही,…

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