लिखना चाहूँ भी तो क्या लिखूँ माँ, कहने को अल्फाज तो बहुत हैं, मगर तेरा प्यार भी तो असीम है, कोई कहानी जैसा प्यार भी तो नहीं है तेरा, किसी मुशायरे की शायरी जैसा मोल […]

रिश्ता खून का नहीं है उनसे फिर भी मां बाप की तरह वो फटकारते हैं। यूं तो पैरों पे चलना मां बाप सिखाते हैं। पर वो शिक्षक हैं साहब पैरों पर खड़े होना तो बस […]