लिखना चाहूँ भी तो क्या लिखूँ माँ, कहने को अल्फाज तो बहुत हैं, मगर तेरा प्यार भी तो असीम है, कोई कहानी जैसा प्यार भी तो नहीं है तेरा,
किसी मुशायरे की शायरी जैसा मोल भी तो नहीं है तेरा, जो चंद लफ्जों में बयां कर सकूँ ……
लिखना चाहूँ भी तो क्या लिखूँ माँ, कहने को अल्फाज तो बहुत हैं, मगर तेरा प्यार भी तो असीम है, कोई कहानी जैसा प्यार भी तो नहीं है तेरा,
किसी मुशायरे की शायरी जैसा मोल भी तो नहीं है तेरा, जो चंद लफ्जों में बयां कर सकूँ ……
रिश्ता खून का नहीं है उनसे
फिर भी मां बाप की तरह वो फटकारते हैं।
यूं तो पैरों पे चलना मां बाप सिखाते हैं।
पर वो शिक्षक हैं साहब पैरों पर खड़े होना तो बस वही सिखाते हैं
जो जाऊं गलत रास्ते पे तो कान पकड़कर सही रास्ता दिखाते हैं। वो शिक्षक हैं साहब जो खुद से ज्यादा हमें कामयाब देखना चाहते हैं जो हार जाऊं तो हिम्मत भी वही देते हैं हो जाऊ अगर निराश तो बस वही समझाते हैं और हमें भी उनका कुछ हिस्सा सुनाया करते हैं. आजतक का सबसे वर्स्ट बैच देखा है कहकर वो अक्सर अपना गुस्सा हम पे ज़ाहिर करते हैं।
क्लासेस में अपने कहानी किस्सों से वो बोरिंग लेक्चर को भी मजेदार बनाते हैं
वो शिक्षक हैं साहब मंज़िल का रास्ता तो बस वही दिखाते हैं हमें पढ़ाते पढ़ाते अक्सर वो भी अपने स्कूल कॉलेज के दिनों को याद कर लिया करते हैं
पर सबसे ज्यादा खुश भी वो उसी बैच में हुआ करते हैं सुधारलो खुदको मत करो मां बाप का पैसा बरबाद
ऐसा कहकर वो हमें अक्सर चेतावनी दिया करते हैं कुछ इस तरह वो हमें सही रास्ता दिखाया करते हैं
जब होता है आखिरी साल कॉलेज का
तो हम भी इन पलों को याद करके आखें नम कर लिया करते हैं बस हम भी आपका दिल से शुक्रिया करना चाहते हैं
और रहें आप सब खुश बस यही दुआ मांगना चाहते हैं
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