Author: Puneet Mittal

  • दोस्ती प्यार का मीठा दरिया है

    आओ, मुझमें नहाओ,
    डूबकी लगाओ
    प्यार का सौंधा पानी
    हाथों में भर कर ले जाओ।

    आओ,
    जी भर कर गोता लगाओ,
    मौज-मस्ती की शंख-सीपियाँ
    जेबों में भर कर ले जाओ।

    दोस्ती का दरिया
    गहरा है, फैला है
    इसमें नहीं तैरती
    धोखे की छोटी नौका
    कोशिश की तो
    बचने का नहीं मिलेगा मौका।

    – Puneet

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