Rahul's Posts

ग़ज़ल

२१२२ १२१२ २२ अपने ही क़ौल से मुकर जाऊँ । इससे बेहतर है खुद में (खुद ही) मर जाऊँ ।। तू मेरी रूह की हिफ़ाजत है ; बिन तेरे जाऊँ तो किधर जाऊँ । तेरी साँसों को ओढ़कर हमदम ; जिस्म से रूह तक सँवर जाऊँ । इश्क में हद तो पार तब हो जब ; जिस्म से रूह सा गुजर जाऊँ । यूँ तो कतरा हूँ तुम छुओ गर तो ; इक समन्दर सा मैं भी भर जाऊँ । जिस्म को लाद कर चलूँ कब तक ? दिल तो करता है अब ठहर जाऊँ । तुमको पाना हो तब मुकम्मल जब ;... »

श्रद्धांजलि

गीत आधार छंद-द्विगुणित चौपाई कुल ३२ मात्राएँ , १६-१६ पर यति ★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆●★■◆◆●★■◆●★■◆●★ आओ तुमको ले चलूँ वहाँ, जिस जगह वीर इक सोया था । डोली थी सजी हुई लेकिन, वह आत्ममुग्ध सा खोया था । आँखों में चमक अजब सी थी, जैसे पौरुष को जीता हो । था मगर उनींदा ज्यों सपनों, को हाला जैसा पीता हो । होंठों पर मुस्कानें लेटीं, खुद का सौभाग्य जताती थीं । उस वीर पुरुष की दिव्य कथा, सम्मान सहित बतलाती थीं । फलद... »