Author: मन की बात

  • ख्वाहिश ॥।

    क्यों  रही ख्वाहिश एक लडके की ॥

    हमेशा लडकी को कहाँ ॥

    कभी चाँद कहाँ तो कभी गुलाब ॥

    कभी जलता दिया तो कभी महकती फीजाए॥

    चलती पवन तो कभी समुद्र का शाहील ॥

    कभी धन लक्ष्मी तो कभी घर की नीव ॥

    हर लवज से नबाजा पर क्यो खामोश हैं ॥

    जब ख्वाहिश  हुई लड़के की ॥

    जिन्दा ही मार दिया ॥

    न चाँद ,गुलाब ,धन,नीव,

    शाहील ,हवा ,दियाँ  नजर आया ॥

    बस   एक ख्वाहिश  ॥

    मन की बात ॥

    रेनू गोयल ॥

     

  • पैसा की चाहत ॥

    पैसे की चाहत ने ॥

    मन तो मेरा कोमल था ॥

    तेरी चाहत ने खुदगरज बना दिया  ॥

    हर रिश्ता अपना सा था ॥

    बेगाना बना दिया ॥

    शान्ति,नीद अपनी थी ॥

    पर बीमारी के सग जीना सीखा दिया।

    अकेला हूँ  आज हर अहसास  से ॥

    तेरी चाहत ने अहपाईज बना दिया ॥

     

    रेनुका गोयल ॥

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