क्यों  रही ख्वाहिश एक लडके की ॥ हमेशा लडकी को कहाँ ॥ कभी चाँद कहाँ तो कभी गुलाब ॥ कभी जलता दिया तो कभी महकती फीजाए॥ चलती पवन तो कभी समुद्र का शाहील ॥ कभी […]

पैसे की चाहत ने ॥ मन तो मेरा कोमल था ॥ तेरी चाहत ने खुदगरज बना दिया  ॥ हर रिश्ता अपना सा था ॥ बेगाना बना दिया ॥ शान्ति,नीद अपनी थी ॥ पर बीमारी के […]