सपनो की दुनिया आँखों में लिए चले थे दूर, पता नहीं था हो जायेंगे वो इतने मजबूर | षडयंत्रो की चालो में जो बुरे फंसे मजदूर, कहाँ पता था हो जायेगा वक़्त भी इतना क्रूर […]