ये पेशानी पे जो लकीरें सी खिंची हुईं है, आँखों के तले बेनूर रातें सी बिछीं हुईं हैं, ये जो कांपते हाथों में काँच की चूड़ियाँ हैं, ऐश-ओ-आराम से जो ताउम्र की दूरियाँ हैं, ये […]

रिश्ते ना गहरा सागर हैं ना जल माटी की गागर हैं वे तो बस बहता दरिया हैं जीवन जीने का ज़रिया हैं कुछ रिश्ते तुम्हारी क़िस्मत हैं, कुछ रिश्ते तुम्हारी हसरत हैं, पर हर रिश्ता […]