जीवन के इस सफ़र में प्रकृति ही है जीवन हमारा, बढ़ती हुई आबादी में किंतु हर मनुष्य फिर रहा मारा-मारा॥ मनुष्य इसको नष्ट कर रहा है जिंदगी अपनी भ्रष्ट कर रहा है, करके नशा देता […]

वो दूसरों की गलती वो दूसरों पर एहसान चाहे मिले बेइज़्जती या मिले सम्मान वो दर्द का आलम वो प्रेमिका की बेवफाई वो उससे मिला धोखा या फिर लंबी जुदाई अक्सर भूल जाता हूं मैं, […]

  क्या इस साल भी लड़ना है तुमको धर्म और जाति के नाम पर क्या इस साल भी लुटने देनी है लड़की की इज़्जत नीलाम पर क्या इस साल भी सोचा है तुमने फिर से […]