Author: Sachin Mehra

  • Tera Intezaar

    मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ
    वो ग़ज़ल आप को सुनाता हूँ
    एक जंगल है तेरी आँखों में
    मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ
    तू किसी रेल सी गुज़रती है।
    मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ
    हर तरफ़ एतराज़ होता है मैं अगर रौशनी में आता हूँ

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