Author: sakera tunvar

  • बेटीयां

    जब वो पेदा होती है तो,
    हर कीसी के दिमाग में उदासी छा जाती है,
    बाप के सिर का बोझ भी कहीं जाती है,
    लेकिन उसी बाप के सिर का ताज बन जाती है,
    अपनों के लिए हर ग़म से लड़ जाती है,
    फिर भी लोग कहते हैं बेटीयां सिर्फ बेटीयां ही कहलाती है,
    अपने हूनर को करने साबित उड़ाने लगी हवाई जहाज ये बेटीयां,
    फिर भी हर बार क्यु कौसी जाती है ये बेटीयां।

  • यादों को फिर से समेटना है।

    जब छोड़ के आए थे गाॅऺव को हम,
    तब हमें न पता चला था अपना ग़म,
    लेकिन इस महामारी में याद आए गाॅ॑व के हसीन पल,
    जहां मिल जाता था हर समस्या का हल,
    आज लंबे अरसे के बाद वहां जाना है,
    क्योंकी यहां हर मजदूर बेबस और बेचारा है,
    रेलवे में बैठकर एक दफा इस शहर को देखना है,
    छुटी हुइ यादों को एकबार फिर से समेटना जो है।

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