Nand L Sarswat's Posts

तेरी सुबह बङी निराली है

तेरी सुबह बङी निराली है.. तेरी शाम मधुर सुहानी हैं.. एे जानो जिगर से प्यारे वतन.. तेरे वैभव की अमर कहानी हैं वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् है चरण पखावत सिंधु तेरे मस्तक पर सजा हिमाला हैं है पुरब लालिमा सूरज की और पश्चिम उदय उजाला हैं है हरी वसुन्धरा सुख दायी.. तेरे वीरों की अमर कहानी हैं ऐ जानो जिगर से प्यारे वतन तेरे वैभव की अमर कहानी हैं वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् है बाईबिल ... »

जीवन चक्र

हर सुबह उठकर भागता हूं, मैं सब के लिए सुख कमाने, हर शाम घर लौट आता हूं, मैं सबका हिसाब चुकाने, बिता दिये हैं अनगिनत दिन मैंने और बे-हिसाब ये रातें मगर मुक्त नहीं हुआ अभी सबका कर्ज चुकाते चुकाते फर्ज का कर्ज मेरा मुझको चुकाना ही होगा, अलबता गम को भुला देता हूं हंसकर मैं जिम्मेदारि निभाते निभाते ——————————– »