Author: Satya Priya Khanna

  • ek sher

    मैं कफ़न में बूत पड़ा था
    जश्न मेरा सर-ए-आम निकला
    ऐ बन्दे तुझे ज़मीन मुबारक
    मुक़द्दर में मेरे आसमान निकला

  • ek sher

    हंस देते अगर कभी हँसना सीखा होता
    हाथ थामे रही शाम-ए-उल्फ़त हमारा
    बता देते धुप क्या है
    अगर सेहर में आफताब को देखा होता

    -सत्य ‘प्रिय’ खन्ना

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