तन्हा चल रहा था सड़क पर मैं, तब देख रहा था मुझकों, “बाशिंदा उसका” , बड़ा मासूम सा वो,तबस्सुम कहीं खोई हुई, निगाहे तलबगार, और चेहरा उदास था उसका, जिस हाथ में “होनी थी कलम”, […]