Author: Shivang Singh

  • किरदार कितने है

    किरदार कितने है

    हर कोई पहनता एक वेशभूषा
    एक नए वार्ता के साथ
    नई जिम्मेदारियां हर रोज़
    पर अब भी सवाल इतने है की
    किरदार कितने है।।

    किसी ने मुस्कुराकर किरदार को जिंदगी बना लिया
    किसी के जिंदगी में किरदार बहुत है
    है रोज़ कई को निभाते देखते हैं ये
    जो की अब जिम्मेदारियां बन गई है
    सुबह से ढलते शाम में
    ये बदलते लोगो के चाल जितने है
    कि अभी भी पूछता हूं अकसर मैं
    किरदार कितने है।।

    मुस्कुराहट के पीछे वो राज़ गहरा है
    जो घिस गई हो चप्पल उसका काम गहरा है
    खुद को ढाल कर उस किरदार में
    ये किरदार तो जैसे इंसान बन जाता है
    जन्म से लेकर मृत्यु तक
    वो पहचान के पीछे इंतजाम इतने है की
    सवाल है अब भी की
    किरदार कितने है।।

    एक किरदार में मैं भी हूं
    कभी यारो का किरदार लिए चलता हू
    तो कभी जिम्मेदारियों का प्यार लिए चलता हूं
    कभी कदार मायूस हो जाता हूं इस किरदार से
    इन पानी की लहरों की तरह मैं भी इन किरदार में बहता चला जाता हूं
    बंधे ये जो बेड़ियों में, जिम्मेदार कितने है
    सोचता हूं मैं अक्सर की
    किरदार कितने है
    किरदार कितने है।।

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