Author: Shubhra Laxmi

  • मजदूर

    मजदूर

    काफी दूर चले आए थे ,
    रिश्तों को निभाते निभाते ,
    खबर मिली की सब कुशल है ,
    मगर खुद को खो दिया
    सबको पाते पाते ।
    इंतजार मत करना की
    मैं कब आऊंगा ,
    अब थक गया हुं ,
    पैसा कमाते कमाते ।
    लोगों ने पूछा सब ठीक है न ,
    और मैं थक गया अपना दर्द जताते जताते ।

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