काफी दूर चले आए थे ,
रिश्तों को निभाते निभाते ,
खबर मिली की सब कुशल है ,
मगर खुद को खो दिया
सबको पाते पाते ।
इंतजार मत करना की
मैं कब आऊंगा ,
अब थक गया हुं ,
पैसा कमाते कमाते ।
लोगों ने पूछा सब ठीक है न ,
और मैं थक गया अपना दर्द जताते जताते ।
Author: Shubhra Laxmi
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मजदूर