Author: Sonal Panwar

  • “बचपन की वो मीठी यादें“

    “बचपन की वो मीठी यादें“

    बचपन की वो मीठी यादें ,
    वो नन्हीं-सी अठखेलियां ,
    याद आती है बहुत ,
    वो भोली-सी नादानियां !

    वो माँ का आँचल और
    पापा की अंगुली थामें ,
    चलना, गिरना और फिर संभलना !
    वो नन्हीं हथेलियों से अपने चेहरे को छुपाना ,
    फिर उन्हीं हथेलियों से झांक कर मुस्कुराना !
    वो टिमटिमाते तारों को पकड़ने की आस में
    आसमान को एकटक यूँ ही तकते रहना ,
    और न पाकर उन्हें मायूस-सा हो जाना !
    वो नन्हें हाथों से मिट्टी का घरोंदा बनाना ,
    और लहरों का उसे अपने संग बहा ले जाना ,
    लेकिन फिर भी मिट्टी के नए घरोंदे बनाना !
    वो बारिश की फुहारों से ख़ुद को भिगोना ,
    और घर आकर माँ की डांट खाना ,
    लेकिन अगले ही पल एक प्यारी-सी मुस्कान पर ,
    माँ के गुस्से का गायब हो जाना !
    वो नए-नए खिलौने लाना और
    अपनी गुड़िया से बातें करना ,
    वो आइसक्रीम और चॉकलेट की
    अपने बड़ों से सिफारिश करना ,
    वो इन्द्रधनुषी रंगों से
    अपने घर की दीवारों को सजाना ,
    वो तुतलाती हुई आवाज़ में
    नई-नई कवितायें सुनाना ,
    और सवालों की लम्बी लड़ियों में
    सबको यूँ ही उलझाना !
    वो भोली-सी सूरत बनाकर
    अपनी हर ज़िद मनवाना !
    वो मासूम निगाहों से
    अनकही बात बताना !

    बचपन की वो मीठी यादें ,
    वो बीता हर लम्हा ,
    याद आता है बहुत ,
    जब होती हूँ तनहा !

    काश, लौट आए बचपन के वो दिन ,
    और भर दें मन में जीने की वही उमंग ,
    ना कोई चिंता हो , ना कोई शिकन ,
    जिंदगी में हो बस खुशियों की तरंग !

    बचपन की वो मीठी यादें …….

    – सोनल पंवार

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