मैं काल हूँ, नालंदा की आपबीती दुहराता हूँ | ये जो धरती है यहाँ की, महाविहारा कहलाती थी | अब भी मैं ये सोच रहा हूँ, क्यों भाई थी ‘बुद्ध’ को ये धरती, जिसने इसका […]

ये कैसी है आस्था, जिसमे समाई नौकरशाही | ये कैसी है व्यथा, जिसे सुन कर मन डगमगाई || ये कैसी है अखंडता, जिसमे धर्मनिरपेक्षता की नींव मरमराई | ये कैसी है अटूटता, जिसमे भ्रमता की […]