Sonu, Author at Saavan's Posts

नालंदा की आपबीती दुहराता हूँ |

मैं काल हूँ, नालंदा की आपबीती दुहराता हूँ | ये जो धरती है यहाँ की, महाविहारा कहलाती थी | अब भी मैं ये सोच रहा हूँ, क्यों भाई थी ‘बुद्ध’ को ये धरती, जिसने इसका अलग नामकरण का विचार किया | ये धरती बड़े- बड़े वंशों का उद्धार किया | पर पता नहीं क्या बात ‘कुमारगुप्त’ के मन में आयी थी | राजनीती रहस्य तो नहीं हो सकता , जो उसने नींव डाली थी, एक छोटे से ज्ञान की ज्योति में इतना तेल डाल... »

नौकरशाही आस्था

ये कैसी है आस्था, जिसमे समाई नौकरशाही | ये कैसी है व्यथा, जिसे सुन कर मन डगमगाई || ये कैसी है अखंडता, जिसमे धर्मनिरपेक्षता की नींव मरमराई | ये कैसी है अटूटता, जिसमे भ्रमता की नक्काशी समाई || वो कौन सी है व्याख्या, जिसे सुनाकर हुए हैं विख्यात | वो कौन सी है अदा, जिसे प्रदर्शित कर करते हैं आयात || वो कौन सा है व्यवसाय, जिसमे पाते हैं लाभ अकस्मात | वो कौन सा है पाप, जो धुलता है करने के पश्चात || किस ... »