ऐक हजारों धरती माता, ऐक ही आसमान, मजहब के झगड़ों में क्यूँ उलझ रहा इंसान, यही मैं सोच -सोचकर हैरान, यही मेै सोच-सोचकर हैरान, भारी -भारी पत्थर लेकर मंदिर रोज बनाते हैं, उस पत्थर में […]

पाकिस्तान की औखात को देखकर ये भाव उठे, कोई गलती हो तो क्षमा करना — जल जला उठा वो सैनिक, जिसमें जान बाकी है, लहु से श्रंगार कर दुंगा, बस यही अहसान बाकी है, काफूर […]

मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, बंद लतीफों की खड़े -खड़े मल्हार देख रहा था, सोचा था तंग आकर लिखूंगा ये सब,मगर ये क्या, कागज के टुकडों में दफन विचार देख […]