Sumita Kanwar, Author at Saavan's Posts

मैं तेरे साथ हुँ

मुश्किल हैं , थोडी राह कठिन हैं , पर कोई नहीं, मैं तेरे साथ हुँ । खुद पर भरोसा रख तू , कुछ न सही , पर कुछ सीखा हैं । यहीं बस यकीन रख तू , मैं तेरे साथ हुँ । आज जो हुआ , वो कल न होगा , कल जो होगा , वो आज से बेहतर होगा । यकीन खुद पर रखना होगा , इसीलिए मैं तेरे साथ हुँ । कल जहाँ मैं थी , आज वहाँ तू है, मेरे संग कोई न था , अकेली मैं ही थी , पर इस बार मैं तेरे साथ हुँ ।। »

बस! अलविदा न कह सके ।

कुछ कहा नहीं, पर रूके भी कहाँ ! कहना था अलविदा , पर समय कहाँ ! इस वक्त की रहमत कि हम न कह सके , न उनसे मिल सके , बस ! अलविदा न सके ।। वो पास था , वो कोई करीबी था , बस ! नज़रें झुकाए मेरे सामने खडा था । फिर भी, क्यों नहीं कहा था , उनसे अलविदा ? यादें ही उसकी अब साथ हैं, कोई साथी ही नहीं , कि दिखा दु अपनी नज़रों से तस्वीर उसकी । रहना था साथ उसके , पर सफर वो अधूरा रह गया ! बस ! अलविदा ना कहा गया ।। क... »

कविता :- वो अकेला हैं

वो अकेला हैं , इसलिए साथ चाहिए , जो समझ सके , उसके हालत, उसकी पीडा । वो किसान हैं, वो अन्नदाता हैं , कोई और नहीं वो एक पेड पर फिलहाल लटकता हुआ , आज एक शव है ! वो तरसता हैं हर बूँद को , जिसे हर घडी हम नलों से बहाते हैं , वो अकेला हैं , इसलिए साथ चाहिए । शहर हुआ विकसित , गांव भी हुआ विकसित , कोई किसान से तो पूछो , वो कितना हुआ विकसित । कर्ज में डूबा हैं वो, पहनने के लिए दो जोडी , आज भी फकीर बना हैं ... »