Author: Suyash

  • गाँठ

    आज फिर तुम्हारे झगड़े ने देखो,
    कितने अरमान बहा दिए
    अभी उन होथो पर हर्ष था,
    इस धरा पर उनका निर्मल स्पर्श था|

    तेरी लड़ाई ने उन्हे दफ़ना दिया
    जिसे बचना था उस लोह को बुझा दिया
    तेरे न्याय ने देख आज धरती को रुला दिया
    गाँठ को और उलझा दिया|

    नादान आखो को हमेशा के लिए सुला दिया
    ख्वाबो को पर लगाने थे तुझे,
    तेरी लड़ाई ने सोच को मिटा डाला
    जिसे बचना था उस लोह को बुझा डाला|

    तकदीर बदलना चाहता था मे
    जो तूने तकदीर दी उसे ख़तम करना चाहता था मे,
    पर तेरी लड़ाई ने मुझे बदल डाला,
    तेरी लड़ाई ने मुझे तेरे जैसा बना डाला||

     

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