Author: UMESH PANSARI

  • तुम और मैं….

    उस दिन मैंने तुमको,
    पहली बार ही देखा था,
    जब तुमने मेरे ऊपर,
    गलती से गुलाब फेंका था,
    न जाने क्यों उसके,
    कांटे मुझे न चुभे,
    लगा तुमने दिल का मरहम,
    सरेआम फेंका था,
    बोली मैंने इज़हार किया,
    अब तुम्हारी बारी है,
    गुलाब देकर मैंने कहा,
    फिर ये जान तुम्हारी है….
    – उमेश पंसारी

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