मन ही मन मैं एक, ‘तस्वीर-ए-खूबसूरती’ बनाया करती हूं। वक्त की रफ्तार बढ़ती जाए, और मैं सब्र के घूंट भरती हूं। रोज उगते सूरज के साथ, उम्मीद की किरण बनाती हूं। रंगो के बागीचे में, […]