कुछ बच्चे औपचारिक शिक्षा के लिये अपने को अयोग्य पाते हैं किन्तु उनके अभिभावक इस सत्य को अस्वीकार करते हैं और अनावश्यक दबाव में बच्चे असहज रहते हैं – ऐसे माता पिता के लिये एक […]

आँगन में जो फुदक रही थी एक छोटी सी चिड़िया! दौड़ी उसे पकड़ने उसके पीछे छोटी बिटिया!! बोली मैंने आज पढ़ा है तू है दुर्लभ प्राणी! तुझे संजोना है हम सब को देकर दाना पानी […]

मेरा जीवन कब मेरा है बस आती जाती सांसें हैं इसमें सुख दुख दूजों का है वे दूजे मेरे अपने हैं ! जब जब कोई मेरा अपना हँसता है मैं हंस लेती हूँ ! जब […]