ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं […]
ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं […]
( दुनियां ) एक सोच में डूबी हूँ क्या करूँ और किस काम को छोड़ दूं…. महाकाल , भयावह काल , कोरोना काल का यह समय किस तरफ़ मोड़ दूँ….. समय माँगे जा रहा है […]
….हर तरफ़ एक शोर है…..हर तरफ़ एक ही बात, मुल्क़ के लिए अपनी जान जो दे गए, यथासंभव हमें देना हैं मिलकर उनके परिवार का साथ….. जोड़ सकते है हम अगर एक लहर को तो […]
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