कहीं दूर किसी नदी किनारे, दो पल को बैठना है मुझे। सारी उलझन को धुआं बनते देख, चैन से दो पल रुकना है मुझे। सांसे जब घुटन का पिंजरा बन जाए। बेईमान तकदीर जब ताला […]