हाइकु

हाइकु -2

रोते हो अब काश। पकड पाते जाता समय। अँधेरा हुआ ढल गई है शाम यौवन की। रात मिलेगा प्रियतम मुझको चांद जलेगा। आ जाओ तुम एक दूजे मैं मिल हो जाएं ग़ुम। पहाड़ी बस्ती अंधेरे सागर में छोटी सी कश्ती। आंखें हैं नम अपनो से हैं अब आशाये कम। रिश्ता है कैसा सुख में हैं अपने मक्कारों जैसा। »

हाइकु -१

बेपरवाह है फिरता दर दर रमता जोगी। चलते जाओ यही तो है जीवन नदिया बोली जनता से ही करता है सिस्टम आंखमिचोली। घूमो जाकर किसी ठेठ गांव में भारत ढूँढ़ो। लक्ष्य है पाना तुम एक बनाओ दिन रात को। कुछ कर लो सौभाग्य से है मिला मानव तन । »

ठोकर

कदम-दर-कदम है ठोकर लगी। ज्ञान की जोत दिल में है निश दिन जगी। फिर भी ना बुद्धि तुम्हारी बढ़ी।। »

चिन्ताओं का लहर

लाॅकडाउन भी देखो बेअसर हो रहा। सारे भारत में कोरोना का बढ़ता कहर हो रहा। रात में नींद आती न दिन में है चैन अब चिन्ताओं का घर में लहर हो रहा।। »

कर्म करे मानव…!!

प्रस्तुत है हाइकु विधा में रचना :- जिसका जो हो कर्म करे मानव ना करे चोरी जीत ले बाजी हर दांव की वह ना थके कभी संघर्ष करे नित जीवन में वो ना रुके कभी कर्म की बेदी और मानव प्रण ले आगे बढ़…!! »

मज़दूर हूँ

प्रस्तुत है हाइकु विधा में कविता:- मजदूर हूँ पैदल चल पड़ा घर की ओर विपदा आयी सबने छोड़ दिया मौत की ओर आशावादी हूँ खुद ही जीत लूँगा यह युद्ध भी तुम कौन हो? समाज या शासन बोलो खुद ही बन निष्ठुर हमे ढ़केल दिया काल की ओर…!! 5 7 5 »

सच्चा और भोला भाला

जमाने में सबसे निराला है । इसलिए नहीं कि मेरा यार है वो , मन का बड़ा हीं सच्चा और भोला भाला है।। »

जुदाई के बाद

हर कसम टूट जाते हैं मुहब्बत के एक कसम खाने के बाद। इश्क़ रंग लाता है जुदाई के बाद।। »

जेठ का महिना

जेठ का महिना भी अबकी कमजोर लगता है। शायद कोरोना ने इसे भी लाॅकडाउन कर दिया। »

धर्मयुद्ध

कोई वरिष्ठ था कोई गरिष्ठ था कोई पहनके इच्छामृत्यु का चोला। पुत्र मोह के चादर में कोई और प्रतिशोध आदर में कोई ले तन मन में प्रतिकार का गोला।। मित्र सम्बन्धी बनकर कोई लवण की ऋणियाँ बनकर कोई धर्मयुद्ध करने को आए कुरूक्षेत्र के टोला। »

हार भी एक जीत है

तू मेरा मनमीत है तुझसे मेरे जीवन का हर गीत है तेरा साथ जो हो तो हार भी एक जीत है। »

को बृषभानुलली सम

धवल चन्द्र सम उसका चेहरा । कनक कपोल पे एक तील का पहरा। अरुण अधर अनार कली सम।। भृकुटी कमान नजर शर शोभित । कुहू कुम्भ लट घुर्मित केशपाश से शोभित। भधुर बोल बड़ मधुर डलीसम।। उन्नत भाल नासिका अति उन्नत। सुखद मनोहर अंक जस जन्नत । ‘विनयचंद ‘को करुणाकारी को बृषभानु लली सम।। »

होली में

होली में होगी ना अबकी हुरदंग। ना पानी ना कीचड़ ना दारु ना भंग खुशियाँ हीं खुशियाँ प्यार का रंग ।। »

सूक्ति

मात पिता की कर वंदन। सेवा सतत सहित निज तन मन धन। होवे आयु बल विद्या यशवर्द्धन ।। »

श्याम छवि

शीश जटा एक बेणी लटकत लटकत लट लटकन मुखचंद्र पे वारिद ऐसे लुकछिप खेल करत हो जैसे।। »

ममता की मूरत

जिसकी सबको बड़ी जरूरत है अगली पगली जैसी तैसी दिल की खूबसूरत माँ ममता की मूरत है ।। »

पहचान

अगर मैं होती गरीब किसान की उपजाऊ भूमि बंजर होने पर जरूर दुत्कार दी जाती मैं होती कुमार के चाक मिट्टी उसी के दिए आकार में ढल जाती मैं होती माली के बाग का फूल मुरझाने के लिए गुलदस्ते में छोड़ दी जाती मैं होती किसी महल की राजकुमारी विवाह के बाद छोड़ उसे मै आती कहने को तो होती मै लक्ष्मी घर की पर अलमारी के लॉकर की चाबी बनकर रह जाती चाहे चिल्लाऊं मै खूब जोर से फिर भी मन की व्यथा ना कह पाती चाहे मैं होत... »

हाइकु

हथेली पर सपनों की घड़ियाँ साकार नहीं। नदी के पार रेत के बडे़ टीले हवा नाचती। अशोक बाबू माहौर »

हाइकु

हथेली पर सपनों की घड़ियाँ साकार नहीं। नदी के पार रेत के बडे़ टीले हवा नाचती। »

अच्छे दिन…!

अच्छे दिन…! अच्छे लोग तो खुश हो ही रहे हैं अच्छे दिनों से ..!. आशा बहुत अच्छा जो हो रहा है और भी होगा…! बुरे लोगों के बुरे दिन आये हैं बरबादी के …! ना सुधरेंगे फंसे हुए जो हैं ये घूस लेकर …! सजा मिलेगी लूटा देश जिन्होंने उन्हें जरूर ..! देश भक्ति के दिन अब आये हैं खुशहाली के ..! ” विश्वनंद” An attempt at Haiku in Hindi (5,7,5). »

पंछी

उडता पंछी नील गगन फैला विशाल हाथ। »

कोई शिकवा नहीं है

कभी रुलाया है, तो कभी हंसाया भी है, जिन्दगी तुझसे कोई शिकवा नहीं है, कभी खोया है, तो कभी पाया भी है »

SHAYARI

तेरी देहलीज टपने खातिर काफी दिनों से कुछ किया ही नहीं। ऐसा लगा मानो  जिंदा रहके भी इस दौरान  मैं जिया ही नहीं। »

गुज़री……..

ज़िन्दगी तो हमारी गुज़री…. मगर, गुज़र…..गुज़र…..कर गुज़री….. ……………..!!                                                   …………………D K »

हाइकु

डूबती नाव अंबर सागर में दूज का चाँद। पिघल-रहा लावा दिल अंदर आँखें क्रेटर । सिसकी हवा उड़ चल रे पंछी नीड़ पराया । यादों के मोती चली पिरोती सुई हार किसे दूँ। आसमान ने डाले तारों के हार घरों के गले। चौथ का चाँद सौत की हंसुली-सा खुभा दिल में। गया निगल एक पे एक गोटी कैरम बोर्ड। – Atul »

कविता

कविता

चलो चले … किसी नदी के किनारे किसी झरने के नीचें | जहाँ तुम कल कल बहना झर झर गिरना और… और मैं मंत्रमुग्ध हो झरनों की लहरों की अंतर्धव्नि से राग लेकर लिखता जाऊँगा | चलो चले… किसी उपवन में या कानन में ! वहाँ तुम कोयल से राग मेल करना या पपीहे के संयम को टटोलना और मैं उन संवेदनाओं की लडी अपनी कविता रूपी माला में पीरो कर तुम्हारा श्रृंगार करता रहुंगा | चलो चले… सागर के तट पर तुम ... »

कविता

” मै ही तो हूँ- तेरा अहम् ………………………….. मै ही तो हूँ तुम्हारे अंतरात्मा में रोम रोम में तुम्हारे | मैं ही बसा हूँ हर पल तुम्हारे निद्रा में जागरण में | प्रेम में घृणां में उसांसो से लेकर तुम्हारे उर्मियों तक | मैं हूँ बस मैं ही हूँ न पुर्व न पश्चात तेरा कोई था न होगा | एक मेरे सिवा तुम्हारे एहसास के परिसीमन के दायरे का कोई अंत नही. औ... »

कविता

चलो चले … किसी नदी के किनारे किसी झरने के नीचें | जहाँ तुम कल कल बहना झर झर गिरना और… और मैं मंत्रमुग्ध हो झरनों की लहरों की अंतर्धव्नि से राग लेकर लिखता जाऊँगा | चलो चले… किसी उपवन में या कानन में ! वहाँ तुम कोयल से राग मेल करना या पपीहे के संयम को टटोलना और मैं उन संवेदनाओं की लडी अपनी कविता रूपी माला में पीरो कर तुम्हारा श्रृंगार करता रहुंगा | चलो चले… सागर के तट पर तुम ... »

कविता

अब और परीक्षा नही… अब और परीक्षा नही प्रतिक्षा नही करेंगे | किया नही पर प्रीत हो गई उल्टी जग की रीत हो गई | और तितिक्षा नही वरेंगे || यह अपराध किया ईश्वर ने जिसने रचा तन मन मानव का | जिसने प्रीत और बैर बनाया ओ न सहे तो हम क्यों सहेंगे !! अब और परीक्षा नही सहेंगे प्रतिक्षा नही करेंगे | जब तक प्रीत नही थी बैरी ये कब था संसार ! इसे नही क्यों भा सकता दो पुण्य पथिक का प्यार !! हम कैसे है हम ही जा... »

कविता

” मन के मोती…” पानी के बुलबुले से माला के मोतियों से बिखरता है टूट जाता है | बनता है मन का मोती बन कर के फूट जाता है || स्वप्नों में साथियों से मिलना बिछड भी जाना ! समझा नही मै अब तक जो साथ ही सोया है ओ साथ छूट जाता है | कुछेक क्षंण में ही मन अंदर से टूट जाता है || फिर देखकर जठर भी उलझन में है फंस जाता ! आखिर ये स्वप्न में क्यों ये तथ्य है दिखाता !! जो कल्पना में पाते स्वप्नों मे... »

कविता- संवेदना

कविता- संवेदना… तू कौन है ..! तू कौन है..! संवेदना ! जो अनछुए अनदेखे पहलुओं को एकाएक होने का आभाष कराती है ! तू कौन है..! जो दूसरे की पीडा का उद्विग्नता का बोध कराती है ! तू वही तो नही … जो दूसरों की तकलिफों में आँखे नम कर जाती है ! तू वही बस वही है न ! जो बिना बोले अकारण ही मन को उदास अवशादित और हर्षादित कर जाती है ! तू वही तो नही जो विभत्सता के प्रति घृणां के रूप में अवांछनीय रूप में... »

कविता

तू कौन है ..! तू कौन है..! संवेदना ! जो अनछुए अनदेखे पहलुओं को एकाएक होने का आभाष कराती है ! तू कौन है..! जो दूसरे की पीडा का उद्विग्नता का बोध कराती है ! तू वही तो नही … जो दूसरों की तकलिफों में आँखे नम कर जाती है ! तू वही बस वही है न ! जो बिना बोले अकारण ही मन को उदास अवशादित और हर्षादित कर जाती है ! तू वही तो नही जो विभत्सता के प्रति घृणां के रूप में अवांछनीय रूप में स्वयं ही उत्पन्न हो ज... »

फूलों से सीख लो

फूल से  सीख लो यारों  जीवन  का  फलसफा,  कांटों में भी मुस्कुराने का अंदाज बयां करते हैं।                                                     जिज्ञासु  »

सुरमा लगाया था आँखों

सुरमा लगाया था आँखों में जिसका नज़रें मिलते ही खफा हो गए »

रिश्ते तो अब बौने हो गए है

रिश्ते तो  अब बौने हो गए है ख्वाब तो बस बिछोने हो गए है »

वक़्त का तमाचा

वक़्त का तमाचा हाथ क्या पूछे »

किसकी हसरत कैसी हसरत

किसकी हसरत कैसी हसरत अपने तो दुखों को मिली बरकत उसे गुनाहगार कैसे कह दो सब थी अपनी ही वैसी हरकत »

जिल्द बिन किताब का

जिल्द बिन किताब का फूल बिन हिज़ाब का रातों का नहीं ख्वाब हूँ आफताब का »

न सही गम सही

न सही गम सही खुद बन मरहम सही »

उन्हें ज़िद थी न हारने की

उन्हें ज़िद थी न हारने की कारण बन गई हार का »

घर के अंदर घर नहीं मिलता

घर के अंदर घर नहीं मिलता कोई सुखनवर नहीं मिलता »

बिक गया वो शक्स भी

बिक गया वो शक्स भी जिसे हम सौदागर समझते रहे »

न सूरत में न सीरत में

न सूरत में न सीरत में सब कुछ मन की जीनत में »

कहाँ गई वो हवाएं

कहाँ गई वो हवाएं कहाँ गई वो फ़िज़ाएं बिखर गई अब वफ़ाएं »

हर किताब की कहानी

हर किताब की कहानी पन्नो की मेहरबानी »

सब कुछ वैसा ही

सब कुछ वैसा ही सब कुछ पैसा ही »

वीराना अपना

वीराना अपना वीराना बेगाना वीराने को कौन जाना »

चलो फिर बांट ले

चलो फिर बांट ले गम को फेक डाले खुशिओं को छांट ले »

वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो

वफ़ा क्यों ढूँढ़ते हो गुमी हुई है गुमी रहेगी »

दर्द के पंजों में

दर्द के पंजों में दर्द है »

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