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ek sher

हंस देते अगर कभी हँसना सीखा होता
हाथ थामे रही शाम-ए-उल्फ़त हमारा
बता देते धुप क्या है
अगर सेहर में आफताब को देखा होता

-सत्य ‘प्रिय’ खन्ना

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