Pragya Deole

  • जिनके यार खुदा से हो _

    उन्हें जहाँ तो क्या मौत से भी खौफ कहाँ से हो_

    -PRAGYA-

  • ज़िन्दगी कितनी खरोंचे दोगी_?

    अब तो रूह का रेशा-रेशा भी छील गया_

    -PRAGYA-

  • दूरियों में तुझसे.. अजीब सा हाल हो गया हैं इस दिल का भी_

    जैसे इक नाकाम सा बुत पड़ा हो आती जाती सड़कों पर_
    -PRAGYA-

  • अब साँसे भी सोचकर लेती हूँ___
    कहीं ख़याल तेरे महकने ना लगे
    जो ख्वाब तुमने तोड़े थे
    कहीं दिल फिर उसे बुनने ना लगे___
    -PRAGYA

  • जर्रा को आफ़ताब बना दे वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_

    मैं इतनी क़ाबिल तो नहीं की इंसा के लिबास में फरिश्ता नज़र आऊं_

    बना दे मुझे जो फरिश्ता वो नज़र मेरे दोस्त की हैं_

    खँजर चले इस दिल पर हज़ारो […]

  • तन्हा-तन्हा बौराई सी फिरती हूँ हुज़ूम में भी_

    कहकशाँ लगाती हूँ अपनी ही विरानियत में कुछ हाल-ए-बयां इश्क़ का इस तर्ज़ भी_

    -PRAGYA-

  • चूका ना सकोगे कभी उज़रत हमारे क़ब्ल की_

    दिल में शगुफ्ता सी मोहब्बत..वो कर्ज़ हैं तुम पर_

    -PRAGYA-

  • ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_

    कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_

    -PRAGYA-

  • ज़माना पुछता हैं चेहरे में गज़ब की कशीश- ए-खामोशी हैं_

    कैसे कहे_? हरसू से नूर का तिरगी से भी वास्ता हैं मैं नियूश सा सुनता हूँ दिल हर वक़्त उसका शोर मचाता हैं_

    -PRAGYA-

  • जी रही हूँ..ज़िन्दगी का बोझ उठा रहीं हूँ_

    मोहब्बत की सज़ा बो गये हो तुम मैं गुनाहों की फसल काट रही हूँ_

    -PRAGYA-

  • रक़िब ना बनों उल्फ़त के खामख्वाह वस्ल की जीद से_

    दुरियों में ही सही लबरेज हैं दिल मोहब्बत से क्या इतनी आराईश काफी नहीं ढलती उम्र की पीड़ से_

    -PRAGYA-

  • शब भर यादें तिरी शबनम सी दिल को भिगोती रहीं_

    दूरियाँ इस कदर दरम्यां हमारे सिमट गई की मैं छूती रहीं हर याद तिरी वो अब्तर हो बिखर गई_

    -PRAGYA-

  • यूँ तो बीत गये कई पल बिन तेरे भी_
    पर संग तेरे बीते वो अनमोल पल भुलाये नहीं भूलते_

    ताजिंदगी तुझे चाहने की रज़ामंदी हैं इस दिल की_
    मगर वफ़ा का तेरी मुझे यकीं के इस्बात नहीं मिलते_

    यकीं करूँ तो कैसे-? ल […]

  • शज़र भी सुख जाते हैं बंद दरवाजों में_

    हमें तो एक अरसा हो गया हैं इंतज़ार में तिरी कैद हुए_

    -PRAGYA-