मानते हो सब नारी
का सम्मान हो, फिर भी,
इनका ये हाल क्यों?
चढ़ती हैं भेंट हर युग में
नारी ही क्यों ?
राम ने त्यागा सीता को,
हुई चीरहरण द्रौपदी का,
अब कलयुग में निगाहें
मैली है, इन दुराचारियो की,
बाल विवाह, दहेज प्रथा,
चीरहरण होता है अभी भी,
रिपोर्ट थाने में लिखी
जाती नहीं, सुनवाई कोर्ट
में होती है इतनी देरी से क्यों?
जाते हैं ये जेल चंद दिनों के लिए ही,
होता है इन्हें बेल आखिर क्यों?