Tag: चुनाव पर कविता

  • चुनाव प्रचार

    गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है
    वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है
    मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है
    जब दाल ना गले उनकी, हमपर धर्म प्रहार वो करते है.

    हिन्दू कहे, मै जीत गया तो मंदिर मै बनवाऊंगा
    मुस्लिम कहे, मै जीत गया तो मस्जिद मै बनवाऊंगा
    बेवकूफ़ अच्छे से बना सकता हूँ तुमको
    जीतने के बाद ठेंगा तुम्हे दिखाऊंगा.

    चाहे कोई भी जीते
    जनता जरूर फंसती है
    कभी बिजली की कटौती
    कभी पानी की बूँद को भी तरसती है
    धोखे के समंदर मे डबोते वो हमको
    क्योंकि गहरे पानी मे जनता की कश्ती है.

  • चुनावी दंगल

    नेताजी लाल पीले हैं,
    मुंह में है आग,
    ताशे उनकी ढीले हैं।
    विपक्षी दलों पर आरोपों की कंकरिया फिकवा रहे,
    वादों पर वादों की फुलझड़ीया जला रहे।
    एक दूसरे का कच्चा चिट्ठा जनता को सुना रहे,
    एक दूसरे की बस कमियां गिनवा रहे।
    खुद को ईमानदार सच्चा बतला रहे
    विपक्षी दल को झूठ का पुतला बता जला रहे।

    चुनावी दंगल है शोर ही शोर है,
    एक दूसरे को कह रहे अरे बड़ा चोर है।
    मन में है धुकधुकी नींदें हराम है,
    विपक्षी जीत जाए ना सोच कर बुरा हाल है।
    एड़ी चोटी का जोर मिल के सब लगा रहे,
    अपनी अपनी पार्टी को विजयी बता रहे।

  • राजनीति

    राजनीति

    राजनीति के गलीयारे में
    ऊच नीच सभी बह जाते हैं
    जिसको दुध पिलाकर पाला
    सपोले बनकर डस जाते हैं
    राजनिति की परछाई में पड़कर
    देश को खोखला कर जाते हैं
    शौहरत नाम के लिए राजनेता
    अपनी मॉ का सौदा तक कर जाते हैं
    चलती हैं चुनाव की आगाज
    नेता भी कुत्ता बन जाते हैं
    गली गली चौराहे तक
    पैदल चलते दिख जाते हैं
    नेतागिरी का धौंस जमाकर
    देश को दिमक बनकर चट जाते हैं
    नेता का कोई धर्म संस्कार नहीं
    अपनी जन्मभूमी का सौदा कर जाते हैं
    पहन जनेऊ रखकर सिर पर टोपी
    जनता को गुमराह कर जाते हैं
    जाति धर्म का चुगली करके
    दंगा फसाद करवा जाते हैं
    लम्बी लम्बी बाते करके
    चुनावी दंगल जीत जाते हैं

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    मोबाइल – 9918845864

  • नेता जी का सत्ता

    नेता जी का सत्ता

    मैं इंसान हूँ इंसान ही रहने दो
    मुझे जनजाति में ना बाटो नेता जी
    कभी हिन्दू तो कभी मुश्किल का
    बाटाधार करके वोट ना माँगो नेता जी
    नफरत का जहर जहन में ना डालो
    हम इंसान को वोट के लिए ना मारो
    हमें मुल्क से माँ बाप ने भेद भाव नहीं सिखाया था
    तुम्हारे दशहत गर्दिशो से मारे मारे फिरते हैं नेता जी
    इसका फायदा उठा देश का बाटाधार करते हो
    फैला नफरत की आग रोटी सेंकते हो
    कभी मन्दिर कभी मस्जिद पर लडा़ते हो
    वर्षो पहले की मोहब्बत पर पानी फेर देते हो
    अपने फायदा के लिए देश को भी नहीं छोड़ते हो
    बनकर रंगबाज नेता देश को लुटते हो
    चुनावी दंगल में मीठा मीठा बोलते हो
    बड़े प्यार से फिरकी वोटरो का लेते हो
    दिखा कर अपने को समाजसेवी नेता जी
    देश दुनिया को लुटते फिरते हो
    अपने बातो की अल्फाज में उलझा कर
    देश प्रेम का गीत गाते फिरते हो नेता जी
    इंसानो के ऊपर राज करते हो
    अपने इसी काला बाजारी से नेता जी

    महेश गुप्ता जौनपुरी
    मोबाइल – 9918845864

  • हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्‍वत देते है

    “हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्‍वत देते है

    फिर देश मे भ्रष्‍टाचार बहुत है ये सोच कर हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हम होटलो मे बढी ही शानसे छुटु को आवाज़ देते है

    फिर बाल मजदूरी की बात करते समय हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हमने कभी अपने एरिया , मोहल्ले,कॉलोनी की सफाई के बारे मे नही सोचा

    तो स्‍वछता रॅंकिंग मे हमारा शहर पीछे है ये जानकर हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हमने कभी सामने हो रही छेढ़ खानी का विरोध नही किया,

    तो देश मे महिलाये सुरक्षित नही है ये बोलते समय हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हमने कभी पुलिस की किसी केस को सुलझाने मे मदद नही की,

    फिर यहाँ इंसाफ नही मिलने पर हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हमने कभी नियमो की परवाह नही की,

    फिर यहाँ कोई अनुशासन नही है,इस बात से हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हमने कभी चुनाव वाले दिन को एक छुट्टी से ज्यादा कुछ नही समझा,

    तो राजनीति का हाल बहुत खराब है, इस विचार से हमे बुरा क्यो लगता है………….

    एक मोबाइल लेते समय इतना सोचते है,और देश से जुढ़े मसलो मे कभी एक मिनिट भी सोचने की ज़रूरत महसूस नही की,

    फिर देश की सरकार कुछ नही सोचती ये हमे बुरा क्यो लगता है………….

    हमने कभी देश के लिये कुछ करना नही चाहा ,

    फिर चाय के स्टॉल पर ये कहते समय की इस देश का कुछ नही हो सकता हमे बुरा क्यो लगता है………….

  • ”बदलती राजनीति”

    बदलते राजनीति से मेरी कलम भी मज़बूर हुईं।।
    ना चाहते हुए भी मेरे विचारों में शामिल हुई।।

    राजनीति बदल रही है..
    हर आँख में मटक रही है..
    सपने सिंहासन के दिखा रही है।
    सच झुठ की खिचड़ी में..
    मसालों का मुआयना कर रही है।
    राजनीति बदल रही है।

    हर कोई शामिल है
    जीत की दौड़ में,
    सम्भलो ए सिंहासन के महारथी
    तुम्हारी हर चाल पे नजर रखी है।
    राजनीति बदल रही है।

    बदलाव की तस्वीर लिए
    गली, मोहल्ले घूम रही है।
    खेल ना खेलो तुम.
    ये भारत की राजनीति है।
    तेरे हर वादे का हिसाब रखती है।
    राजनीति बदल रही है।

    छोड़ पूरानी रित…
    नये पैंतरे अपना रही है।
    आकर चुनावी अखाड़े में
    तुझे आज़मा रही है।
    लोकतंत्र की नींव पर
    राजतिलक कर रही है।
    राजनीति बदल रही है।
    हर आँखें में मटक रही है।

    #देवी

  • चुनावों के इस मौसम में

    चुनावों के इस मौसम में
    फिजा में कई रंग बिखरेंगे
    अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग
    हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे

  • वोट डालने चलो सखी री

    वोट डालने चलो सखी री

    वोट डालने चलो सखी री
    लोकतंत्र के अब आयी बारी
    एक वोट से करते हैं बदलाव
    नेताजी के बदले हम हाव-भाव !
    सही उम्मीदवार का करते है हम चुनाव,
    बेईमानों को नहीं देंगे अब भाव !

    आपका वोट है आपकी ताकत
    लोकतंत्र की है ये लागत

    सुबह सवेरे वोट दे आओ
    वोटर ID संग ले जाओ !

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