गलियों मे चुनाव प्रचार के ढ़ोल आजकल बजते रहते है वोट मुझे ही देना भाई, सभी यही कहते है मीठा बोलने से उनके, भावनाओ मे हम नहीं बहते है जब दाल ना गले उनकी, हमपर […]

नेताजी लाल पीले हैं, मुंह में है आग, ताशे उनकी ढीले हैं। विपक्षी दलों पर आरोपों की कंकरिया फिकवा रहे, वादों पर वादों की फुलझड़ीया जला रहे। एक दूसरे का कच्चा चिट्ठा जनता को सुना […]

राजनीति राजनीति के गलीयारे में ऊच नीच सभी बह जाते हैं जिसको दुध पिलाकर पाला सपोले बनकर डस जाते हैं राजनिति की परछाई में पड़कर देश को खोखला कर जाते हैं शौहरत नाम के लिए […]

नेता जी का सत्ता मैं इंसान हूँ इंसान ही रहने दो मुझे जनजाति में ना बाटो नेता जी कभी हिन्दू तो कभी मुश्किल का बाटाधार करके वोट ना माँगो नेता जी नफरत का जहर जहन […]

“हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्‍वत देते है फिर देश मे भ्रष्‍टाचार बहुत है ये सोच कर हमे बुरा क्यो लगता है…………. हम होटलो मे बढी ही शानसे छुटु को आवाज़ देते है […]

बदलते राजनीति से मेरी कलम भी मज़बूर हुईं।। ना चाहते हुए भी मेरे विचारों में शामिल हुई।। राजनीति बदल रही है.. हर आँख में मटक रही है.. सपने सिंहासन के दिखा रही है। सच झुठ […]

चुनावों के इस मौसम में फिजा में कई रंग बिखरेंगे अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे

वोट डालने चलो सखी री लोकतंत्र के अब आयी बारी एक वोट से करते हैं बदलाव नेताजी के बदले हम हाव-भाव ! सही उम्मीदवार का करते है हम चुनाव, बेईमानों को नहीं देंगे अब भाव […]