जब तक नारियल तैल जम न जाये, युगपुरुष केजरीवाल जी मफलर न बाँधने लगे और बोरो प्लस का विज्ञापन आना न चालू हो जाये…… तब तक मै नही मानता की सर्दी आ गयी!!

बन्द मुट्ठी में हैं मगर कैद में नहीं आने वाली, हाथों की लकीरों की नर्मी नहीं जाने वाली, आलम सर्द है मेरे ज़हन का इस कदर क्या कहूँ, के ये बुढ़ापे की गर्मी है यूँही […]

सर्दी गर्मी या वर्षा हो, चाहे अमावस रात हो हैं अडिग हर तूफानों में, चाहे पौष की ठंडी रात हो खड़े रहते हैं सरहद पर, चाहे गोली की बौछार हो मौत से होता है मिलन […]