न तख्तो पे न

न तख्तो पे न ताज़ों पे नज़र रखता हूँ
न कोई जलवा न रिवाज़ों पे नज़र रखता हूँ
जो देखने का मुझे बंद आँखों से जुनूँ रखते है
बंद आँखों से , उन बंद आँखों पे नज़र रखता हूँ
राजेश’अरमान’

Related Articles

हर बार गिरे

  हर बार गिरे ,फिर सम्भले सिलसिला ये बरक़रार रखते है हम वो गुलिस्ता है जो फूलों से नहीं काटों से प्यार रखते है तिरी…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

आसमां ये मुझे कभी खरीद नहीं सकता मैं पाँव हमेशा जमीं पे टी’काके रखता हूँ ।।

जिंम्मेदारियों का बोझ मैं उठा’के रखता हूँ मेले में बेटे को काँधे पे बिठा’के रखता हूँ ।। आसमां ये मुझे कभी खरीद नहीं सकता मैं…

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

Responses

New Report

Close