फुर्सत जब से

फुर्सत जब से ग़ुम हुई
तन्हाई तब से जुर्म हुई
राजेश’अरमान’

Related Articles

तन्हाई

बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर, कि किसी की आवाज़ आई पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई” आपका साथ निभाने को आई शून्यता सी…

गुम गया इंसान

जिंदगी की होड़ में कहीं, गुम गया इंसान, कभी जमीं को खोदता, तो पाताल की सोचता, फिर आसमाँ को रौंदता, चाँद-तारे  नक्षत्रों में खुद को…

Responses

New Report

Close