मुक्तक

मेरा नसीब मुझसे क्यों रूठ गया है?
राहे-मंजिल से रिश्ता टूट गया है!
यादें चल रहीं हैं पलकों में हर घड़ी,
तेरा दामन हाथों से छूट गया है!

मुक्तककार – #महादेव’

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Pragya Shukla

    बहुत ही सुंदर पंक्तियां

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